जब तिरे हाथ में रौशनी देखते
लोग तुझ को अँधेरों में भी देखते
हम जहाँ के अजूबे नहीं देख कर
इन के बदले में तेरी हँसी देखते
एक ख़्वाहिश ये पूरी नहीं हो सकी
हम तुझे अपना होता कभी देखते
हम मोहब्बत में हारी हुई जंग को
जीत लेते अगर बेहतरी देखते
उस को ख़ुश देखने में थी अपनी ख़ुशी
उम्र भर बस उसी की ख़ुशी देखते
— Hasan Raqim















