बाप की डाँट भूल जाता हूँकहते जब आ गले लगाता हूँकोई दस्तक भले न दे लेकिनदीप मैं रोज़ इक जलाता हूँखोजती है नज़र किसे तेरीजब भी आवाज़ मैं लगाता हूँचाँद है आसमान में तो क्यामैं सितारा हूँ टिमटिमाता हूँइक मुलाक़ात याद कर के मैंइक ग़ज़ल रोज़ गुनगुनाता हूँ— Hemant Sakunde