chaand ko chaahna manaa hai kya | चाँद को चाहना मना है क्या

  - Hemant Sakunde

चाँद को चाहना मना है क्या
रात में डूबना फ़ना है क्या

टूट कर गिर गए सितारे गर
ढूँढ़ कोई नया बना है क्या

  - Hemant Sakunde

Chaahat Shayari

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    हमको लगा था सब हमी पे मरते थे

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    माफ़ कर देना अगर मैं लिखने में कुछ देर लूँ

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    हो ग़लत उत्तर अगर तो मुँह फुलाकर फेर लूँ
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