आ तुझे इस शा'इरी के दायरे में घेर लूँ
पर सुनाते वक़्त चेहरा मैं ज़रा सा फेर लूँ
डूब जाता हूँ किसी मंज़र-कशी में देर तक
माफ़ कर देना अगर मैं लिखने में कुछ देर लूँ
ये ग़ज़ल है शे'र है या नज़्म है मुझ को बता
हो ग़लत उत्तर अगर तो मुँह फुलाकर फेर लूँ
— Hemant Sakunde















