akela hi main yuñ jeeta raha hooñ | अकेला ही मैं यूँँ जीता रहा हूँ

  - Deepankar

अकेला ही मैं यूँँ जीता रहा हूँ
मैं बरसों ही यहाँ तन्हा रहा हूँ

मियाँ ख़्वाहिश हमें है ख़्वाब जीना
तभी दिन रात ही सोता रहा हूँ

फ़क़त इक साथ पाने को उसी का
मैं ख़ंजर रोज़ इक सहता रहा हूँ

तुम्हारी सादगी सब से अलग है
मैं तो हर रोज़ उस जैसा रहा हूँ

कि अपनी प्यास को किस से कहूँ हाँ
मैं दुख गज़लों से ही कहता रहा हूँ

हुआ था हादसा भी जान का इक
हूँ अब जो बच गया पछता रहा हूँ

  - Deepankar

Alone Shayari

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