मिलेगा कहाँ ये सुकूँ का पता दे
या दो घूँट मय की मुझे तू पिला दे
कि ये दर्द अब नइँ सहे जाते मुझ से
ख़ुदाया मेरे सीने से दिल हटा दे
या तो रूह को जिस्म से तू अलग कर
या महबूब से मुझ को मेरे मिला दे
तू फिर चाहे जाँ मेरी ले लेना मौला
मगर पहले इक बार का'बा दिखा दे
— Irshad Siddique "Shibu"















