dil shahar ke gali se uthata ye shor hai jaan | दिल शहर के गली से उठता ये शोर है जान

  - Chandan Sharma

दिल शहर के गली से उठता ये शोर है जान
सोने नहीं दे शब भर ऐसा ये शोर है जान

मैं रात भर जला के सिगरेट ये सोचता हूँ
किस ने किसे सदा दी कैसा ये शोर है जान

बाहरस लब पे ख़ामोशी और अपने अंदर
मौजूद मैं नहीं हूँ जितना ये शोर है जान

तड़पाये भी सताये भी और कभी रिझाए
तुझ सा, तेरे तसव्वुर जैसा ये शोर है जान

अच्छे भले लोगों को पागल बना देता है
मानो यकीं तुम्हारा चेहरा ये शोर है जान

है कोई जो सिसकता है और चीखता है
दिल चीर दे सदाएं वैसा ये शोर है जान

है हिज्र काटने को दो रास्ते मेरे पास
इक ख़ामोशी है दूजा रस्ता ये शोर है जान

और हाँ कि शहर ए दिल को ये तबाह कर दे!
मत सोचो आप ऐसा-वैसा ये शोर है जान

शायद किसी से "जाज़िब" नाराज़गी हो या फिर
शायद किसी के ग़म में डूबा ये शोर है जान

  - Chandan Sharma

Shahr Shayari

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