दिल शहर के गली से उठता ये शोर है जान
सोने नहीं दे शब भर ऐसा ये शोर है जान
मैं रात भर जला के सिगरेट ये सोचता हूँ
किस ने किसे सदा दी कैसा ये शोर है जान
बाहरस लब पे ख़ामोशी और अपने अंदर
मौजूद मैं नहीं हूँ जितना ये शोर है जान
तड़पाये भी सताये भी और कभी रिझाए
तुझ सा, तेरे तसव्वुर जैसा ये शोर है जान
अच्छे भले लोगों को पागल बना देता है
मानो यकीं तुम्हारा चेहरा ये शोर है जान
है कोई जो सिसकता है और चीखता है
दिल चीर दे सदाएं वैसा ये शोर है जान
है हिज्र काटने को दो रास्ते मेरे पास
इक ख़ामोशी है दूजा रस्ता ये शोर है जान
और हाँ कि शहर ए दिल को ये तबाह कर दे!
मत सोचो आप ऐसा-वैसा ये शोर है जान
शायद किसी से "जाज़िब" नाराज़गी हो या फिर
शायद किसी के ग़म में डूबा ये शोर है जान
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