"मोहब्बत"
सूरज की उँगलियाँ
घास के भीगे बदन को छू रही हैं
मैं आज टहलने नहीं जाऊँगा
वरना उन की मोहब्बत में ख़लल पड़ जाएगा
— Meem Alif Shaz
सूरज की उँगलियाँ
घास के भीगे बदन को छू रही हैं
मैं आज टहलने नहीं जाऊँगा
वरना उन की मोहब्बत में ख़लल पड़ जाएगा
Other nazm from the same pen
Shers of i love you.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling