“ताजमहल“

इश्क़ वालों का मैं हूँ गीत ग़ज़ल
मैं मोहब्बत हूँ मैं हूँ ताज महल

चाँद तारो से कहती है ये सबा
तुम भी देखो नसीब इस का ज़रा
क़ैद है मुझ में इश्क़ के वो पल
मैं मोहब्बत हूँ मैं हूँ ताज महल

ख़ूब-सूरत हूँ मैं हूँ अब भी जवाँ
देखने आता है ये सारा जहाँ
मैं तो दुल्हन हूँ मैं हूँ ताज़ा कमल
मैं मोहब्बत हूँ मैं हूँ ताज महल

याद आता है मुझ को शाह जहाँ
इश्क़ मिलता है आज ऐसा कहाँ
उस की मुमताज़ का हूँ राज महल
मैं मोहब्बत हूँ मैं हूँ ताज महल

इश्क़ वालों का मैं हूँ गीत ग़ज़ल
मैं मोहब्बत हूँ मैं हूँ ताज महल

— Meem Alif Shaz

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