khizaan men phool patton ka bahut bejaan hona bhi | ख़िज़ाँ में फूल पत्तों का बहुत बेजान होना भी

  - Kaif Uddin Khan

ख़िज़ाँ में फूल पत्तों का बहुत बेजान होना भी
क़यामत है जमालत में ज़रा नुक़सान होना भी

मुसलसल इस अज़िय्यत था हमारा हार जाना फिर
हमारी हार का उस शहर में एलान होना भी

बड़ा मुश्किल अमल है ये सहूलत से नहीं आता
बहुत दुश्वार दिखना भी बहुत आसान होना भी

मोहब्बत वो बला है तय है जिस
में जान से जाना
सुनो अच्छा नहीं होता किसी की जान होना भी

फ़क़त खामोश रहकर तुम तहम्मुल से गुज़र जाना
किसी के सामने अच्छा नहीं हैरान होना भी

चलो माना ख़ुदा होना बहुत दुश्वार है लेकिन
अगरचे सख़्त मुश्किल है महज़ इंसान होना भी

  - Kaif Uddin Khan

Bahana Shayari

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