vo aasmaañ men udaane talash karta hai | वो आसमाँ में उड़ाने तलाश करता है

  - Khalid Azad

वो आसमाँ में उड़ाने तलाश करता है
परिंदा अपने ठिकाने तलाश करता है

कभी सुकूँ न मिला हो जिसे बिना मेरे
वो फ़ासलों के बहाने तलाश करता है

जहाँ पे दफ़्न मैं कर आया था वफ़ा अपनी
जहाँ٫ वहाँ पे खज़ाने तलाश करता है

नए सफ़र पे नए घाव मिल गए लेकिन
वो ज़ख्म अब भी पुराने तलाश करता है

'अजब है दिल के इसे दर्द से मोहब्बत है
हमेशा ग़म के फ़साने तलाश करता है

निभा सके जो मेरा साथ दश्त के अंदर
सो 'ख़ालिद' ऐसे दिवाने तलाश करता है

  - Khalid Azad

Mohabbat Shayari

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