कुछ इस तरह मुझ से गुजर
छू कर मुझे ना हो ख़बर
कोई सीधे दिल पर लगे
कुछ बात कह कर फिर मुकर
जब से गया है छोड़ कर
ग़म से रहा हूँ तर बतर
दिल के करीबी खो कई
है हर तरफ़ ढूँढ़े नजर
गिनती की हर साँस पर
अब हो रही है रहगुज़र
"कोहर" सभी रास्ते अलग
हर इक करे अपना सफ़र
— Kohar















