Kohar
Kohar
Ghazal

कुछ इस तरह मुझ से गुजर

छू कर मुझे ना हो ख़बर

कोई सीधे दिल पर लगे
कुछ बात कह कर फिर मुकर

जब से गया है छोड़ कर
ग़म से रहा हूँ तर बतर

दिल के करीबी खो कई
है हर तरफ़ ढूँढ़े नजर

गिनती की हर साँस पर
अब हो रही है रहगुज़र

"कोहर" सभी रास्ते अलग
हर इक करे अपना सफ़र

— Kohar

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