था न ये भी साल मेरा
फिर है टूटा ढाल मेरा
कर शरारत प्यार से वो
खींचता था गाल मेरा
ज़ख़्म अपनों से मिले है
ग़ैर पूछे हाल मेरा
हौसला तो रख तू "कोहर"
क्यूँ कहे ये काल मेरा
— Kohar
फिर है टूटा ढाल मेरा
कर शरारत प्यार से वो
खींचता था गाल मेरा
ज़ख़्म अपनों से मिले है
ग़ैर पूछे हाल मेरा
हौसला तो रख तू "कोहर"
क्यूँ कहे ये काल मेरा
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