jal nahin hai to giraa bijli magar barsaat to kar | जल नहीं है तो गिरा बिजली मगर बरसात तो कर

  - Divya 'Kumar Sahab'

जल नहीं है तो गिरा बिजली मगर बरसात तो कर
लड़ भले आकर तू मुझ सेे कम से कम तू बात तो कर

तू गया जिस शाम से फिर शाम ये गुज़री नहीं है
अब चलो तारे नहीं तो बनके जुगनू रात तो कर

चाँद सूरज और तारे रखले दुनिया डर नहीं है
नैन काफ़ी हैं तेरे तू नैन से लमआत तो कर

तू सजाले मेरा सेहरा मैं लगालूँ तेरी मेहंदी
मैं चलूँगा साथ तेरे तू इधर बारात तो कर

मेरे सीने में छिपा तू अब बताता क्यूँ नहीं है
तू धड़कता है इधर चल अब धड़क इसबात तो कर

  - Divya 'Kumar Sahab'

Dar Shayari

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