गुफ़्तगू में मुहाल बिस्मिल कुछ
पर गदाई ख़याल शामिल कुछ
वो तिरा बारहा ज़बाॅं लैला
वाक़ई में हयात कामिल कुछ
काट कर रख दिया जुदाई सब
तब कहीं पर बहार नाज़िल कुछ
किस क़दर है सुख़न निगूँ मानी
यार पैदा फ़साद हासिल कुछ
ख़ुश्क लम्हा अता मुहब्बत में
और उस पर शराब क़ातिल कुछ
हाँ कुनू मुश्कबू वफ़ा उस का
पेट पर वो बवाल तिल विल कुछ
— Kunu















