yahaañ sukh ke bitaaye pal kii qeemat bhi bahut thii | यहाँ सुख के बिताए पल की क़ीमत भी बहुत थी

  - Lalit Mohan Joshi

यहाँ सुख के बिताए पल की क़ीमत भी बहुत थी
लगाना दिल पड़ा उसकी ज़रूरत भी बहुत थी

बसाया एक दिल में था कई लोगों को उसने
मगर उस सेे मुझे देखो मुहब्बत भी बहुत थी

मुझे तो बात पत्थर दिल से करने को कहा था
नहीं कर बात उस सेे मुझ
में ग़ैरत भी बहुत थी

सुनो मैं यार उसका ज़ख़्म भी हर सह गया था
मेरी यानी तबीअत में बग़ावत भी बहुत थी

मुहब्बत में तो मैं अनजान ही था दर्द से भी
यक़ीनन दिल मिरे तिल भर इनायत भी बहुत थी

यहाँ शौहर यूँँ ही तो था नहीं मशहूर उसका
उसे तो इस ग़ज़ब फ़न में महारत भी बहुत थी

नई ग़ज़लें सुनाया करता था हर शाम यारों
बहुत था जब लिखा तब तो सख़ावत भी बहुत थी

  - Lalit Mohan Joshi

Bhai Shayari

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