पहले सा आबाद नहीं मैं
अब ख़ुद को भी याद नहीं मैं
अब मैं थोड़ा फ़ासिद भी हूँ
अब कोई शमशाद नहीं मैं
औरों से क्या ही कहता मैं
यारों को भी याद नहीं मैं
शहज़ादी सा रक्खा उस को
हाँ लेकिन शहज़ाद नहीं मैं
उस को भुला के अच्छा ये है
'लेखक' अब शब-ज़ाद नहीं मैं
— Lekhak Suyash















