अब मौसम-ए-बहार पर ग़ज़ल लिखी है
फिर अपने एक यार पर ग़ज़ल लिखी है
तेरी पुकार मेरी रूह तक गई थी
फिर बस तेरी पुकार पर ग़ज़ल लिखी है
तुम सेे जुदा नहीं हुआ अभी तलक मैं
तुम्हारे फिर ख़ुमार पर ग़ज़ल लिखी है
पहले लिखी रक़ीब पर ग़ज़ल हम ही नें
बस फिर हम ही ने प्यार पर ग़ज़ल लिखी है
इक वा'दा तूने जो मनोज से किया था
बस उसके इंतिज़ार पर ग़ज़ल लिखी है
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