“एक रात“
एक पंखा है एक रस्सी है
और तन्हाई काफ़ी अच्छी है
तेरा ग़म सोने पे सुहागा है
जैसे दस्तूर और मौका है
ऐसे मौसम में यही अच्छा है
या तो तू आए तसल्ली देने
या तेरा कॉल भी बहुत होगा
वरना ये ज़िंदगी खोने के लिए
ऐसा माहौल भी बहुत होगा
— Praveen Sharma SHAJAR















