कर लिया मैं ने यक़ीं हरजाई पर
ख़ुश-गुमानी थी मिरी अच्छाई पर
फ़र्क़ रत्ती-भर नहीं अब तक पड़ा
इस मोहब्बत का मिरी तन्हाई पर
क्यूँ न मैं बाग़ी बनूँ आख़िर मुझे
प्यार आता है मिरी हम सेाई पर
अहलिया भी कम नहीं सरकार से
कर लगा रक्खा है पाई-पाई पर
कहती है परछाई बन कर देगी साथ
रौशनी तक साथ है परछाई पर
इक ही तोहफ़ा तो विरासत में मिला
जाँ निछावर मेरी मेरे भाई पर
बे-वफ़ाई तक नहीं हम भाँप पाए
लानत अपनी पारखी बीनाई पर
सच ज़ियादा देर तक छुपता नहीं
तुम यक़ीं रखना मिरी सच्चाई पर
इस क़दर देखें हैं उस के साथ ख़्वाब
झूम उठता हूँ 'मिलन' शहनाई पर
— Milan Gautam















