कभी सिसकती हैं मेरी आँखें
कभी झपकती हैं मेरी आँखें
तेरी यादों में सावन सी दिन
रात टपकती हैं मेरी आँखें
बेलों सी मुरझी इंतिज़ार में
तिरे लटकती हैं मेरी आँखें
मिलने को तुम से पंकज अब तक
यार भटकती हैं मेरी आँखें
— Pankaj murenvi
कभी झपकती हैं मेरी आँखें
तेरी यादों में सावन सी दिन
रात टपकती हैं मेरी आँखें
बेलों सी मुरझी इंतिज़ार में
तिरे लटकती हैं मेरी आँखें
मिलने को तुम से पंकज अब तक
यार भटकती हैं मेरी आँखें
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