"बिन तेरे"

बिन तेरे कुछ भी नहीं ज़िन्दगी मेरी
आ दो पल पास बैठ मेरे
ज़िन्दगी की घड़ी कर दे पूरी

मुकम्मल न हुई ये ज़मीं न मुकम्मल
ये आसमाँ हुआ
अधूरा तेरे बिन सारा कारवाँ हुआ

बिन तेरे कुछ भी नहीं ज़िन्दगी मेरी
तेरे बिन ये बूंदे ये बारिश कुछ भी
मेरा न हुआ

बस जलता दिख रहा है तेरी यादों
का धुआँ सोचता हूँ जब मैं लगता है
जैसे कुछ न हुआ

बिन तेरे कुछ भी नहीं ज़िन्दगी मेरी
आ दो पल पास बैठ मेरे
ज़िन्दगी की घड़ी कर दे पूरी

आग लगी है जो मन में कैसे मैं किसी
को बताऊँ क्यूँ न तुझ को मैं चाहूँ कोई
वजह तो मुझ को बताओ

कड़कती बिजली अँधेरी शाम धीमी सी
बारिश महीना सावन का लाया
आज फिर कोई मेरी यादों में तेरे जैसा
ही हू-ब-हू याद आया

बिन तेरे कुछ भी नहीं ज़िन्दगी मेरी
आ दो पल पास बैठ मेरे
ज़िन्दगी की घड़ी कर दे पूरी

— Pankaj murenvi

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