दिल-फ़िगारों से दोस्ती कर ली

यार यारों से दोस्ती कर ली

वो नहीं आए जब शब-ए-वादा
चाँद-तारों से दोस्ती कर ली

जब गुलों से नहीं बनी मेरी
ख़ार-ज़ारों से दोस्ती कर ली

काम आएँगे बाद-ए-मुर्दन भी
दीन-दारों से दोस्ती कर ली

एक दिन तंग आ के फूलों से
मैं ने ख़ारों से दोस्ती कर ली

आ गई रास दुनिया भी 'ज़ामी'
दुनिया-दारों से दोस्ती कर ली

— Parvez Zaami

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