शिकायत किसी हाल करते नहीं
सिसकते नहीं आह भरते नहीं
उलझते नहीं हम किसी से कभी
नहीं कुछ किया है तो डरते नहीं
हवा में हजर मार दो तुम भले
परिंदे शजर में तो मरते नहीं
बड़े शौक़ से ज़ख़्म खाते हो तुम
यहाँ ज़ख़्म मेरे तो भरते नहीं
न डूबो शराबों में यूँ 'आब' तुम
शराबों में डूबे उभरते नहीं
— Piyush Mishra 'Aab'















