छुवन में मौत छुपी, दुनिया सारी क़ैद हुई
दबी दबी सी यहाँ ज़िन्दगानी क़ैद हुई
जो चीज़ दिखती नहीं है मगर क़रीब मिरे
वो तेरी ख़ुश्बू सी बनके निशानी क़ैद हुई
कहाँ तो टूट के बाहों में उसको भरते थे
कहाँ यूँँ दीद की चाहत पुरानी क़ैद हुई
ये सारी बैठकें सूनी पड़ी हैं तन्हा सी
वो यार दोस्तों की सरगिरानी क़ैद हुई
जो पाँव टिकते न थे घर में कोई भी क़ीमत
वो मौज मस्ती वो तफ़री-गिरानी क़ैद हुई
पुराने क़िस्सों पे जी भर के हम तो हँस लेंगे
नई तरीन तिरी याद-दानी क़ैद हुई
नई सदी की बला से ये आदमी हारा
ये बात दौर की बनके कहानी क़ैद हुई
वो एक वक़्त था जब फ़ासले थे दुश्वारी
ये एक दौर है नज़दीक-आनी क़ैद हुई
भले हैं फ़ासले क़ुर्बत से ख़ौफ़ लगता है
ये क्या बला है जो ऐसी विरानी क़ैद हुई
यहाँ किसे है गरज हम जियें या मर जाएँ
सभी की अपनी ही कोई निशानी क़ैद हुई
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