बेख़ुद-ओ-बेक़रार हम भी थे

दर-ब-दर अश्कबार हम भी थे

उन दिनों दिल-फ़िग़ार हम भी थे
एक धुन पर सवार हम भी थे

हम उदासी में मुस्कुराते थे
सो फ़रेब-ए-बहार हम भी थे

ता-दम-ए-मर्ग ख़ाक-आलूदा
रेत थे या ग़ुबार हम भी थे

हम पे गो इख़्तियार था सबका
लेक बे-इख़्तियार हम भी थे

हम से ऊबा किया जहाँ सारा
सा'अत-ए-इंतज़ार हम भी थे

दश्त-दर-दश्त नाम था अपना
रक़्स में ता-ग़ुबार हम भी थे

जिस जगह इश्क़ ने किया वहशत
ऐ दिल-ए-दाग़दार हम भी थे

हम ने अब्र-ए-रवाँ को रोका था
सर-ब-सर रेग़-ज़ार हम भी थे

तू ने हम को कभी नहीं देखा
पर सर-ए-रहगुज़ार हम भी थे

सुब्ह ने भेद सारे खोल दिए
सुब्ह तक बा-वक़ार हम भी थे

— Prasoon

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