तिरी याद ने इस्तियारे दिखाएसर-ए-दश्त भी अब्र-पारे दिखाएहमें तो तभी डूब जाना पड़ा जबनदी ने थे अपने किनारे दिखाएचुभे है नज़र को मगर दीदनी हैग़म-ए-यार जो भी नज़ारे दिखाएमुहब्बत में इक शब अमावस की शब थीसो इक माह-रू ने सितारे दिखाए— Prasoon