जहान-ए-मोहब्बत के सुल्ताँ हुए हैं
यही जानकर हम ग़ज़ल-ख्वाँ हुए हैं
कभी जिन फ़रेबों ने हैराँ किया था
अभी उन फ़रेबों पे नाजाँ हुए हैं
तुझे याद कर के परीशाँ थे हम पर
तुझे भूल कर हम पशेमाँ हुए हैं
— Prasoon
यही जानकर हम ग़ज़ल-ख्वाँ हुए हैं
कभी जिन फ़रेबों ने हैराँ किया था
अभी उन फ़रेबों पे नाजाँ हुए हैं
तुझे याद कर के परीशाँ थे हम पर
तुझे भूल कर हम पशेमाँ हुए हैं
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