जीत का जज़्बा दिखाने के लिए
लड़ रहा हूँ हार जाने के लिए
बे-सबब आँखों में मत आया करो
तुम फ़क़त हो याद आने के लिए
तोड़ वो दीवार हम तुम मिल गए
जो रिवायत थी ज़माने के लिए
बे-सबब भी कुछ सबब तो चाहिए
आब आँखों से बहाने के लिए
इश्क़ दरिया में सफ़ीना क्यूँ मिले
डूब जा तू पार पाने के लिए
— Prasoon















