"एक सीख"
रिश्ते छूटे मेरे
तो रिश्तों में समझौता करना सीखा
भरोसा हार कर
मोहब्बत में, फिर भरोसा करना सीखा
मुझे समझा नहीं किसी ने
तो लोगों को और अच्छे से समझना सीखा
टूटा जब जब रेत का किला
नया बनाते बनाते सब्र करना सीखा
ख़ुद भटकने के बा'द
मुसाफ़िरों के लिए राहों पर निशान छोड़ना सीखा
दगा सेह के
मैं ने हर बार ही वफ़ा करना सीखा
जब झेला तन्हाई
लोगों के अकेलेपन में साथ रहना सीखा
तमाम उम्र सीख सीख कर गुज़ारी
तो मैं ने हर तजरबे के दो पहलू में से
हर दफा अच्छा ही सीखना सीखा
— Pushkar Tripathi















