किसी से जब तुम्हारा दिल लगेगा
शबों को काटना मुश्किल लगेगा
भले बस एक से टूटे भरोसा
यहाँ हर आदमी क़ातिल लगेगा
जिसे होगा ग़ुमान-ए-इल्म देखो
उसे हर दूसरा जाहिल लगेगा
वो जिस के पास में पतवार होगी
उसी के हाथ तो साहिल लगेगा
कभी आँखों से तो चश्मा उतारो
वगरना तुम को सब धूमिल लगेगा
तुम्हारी आँख से जो पी चुका हो
वो बातों से तुम्हें ग़ाफ़िल लगेगा
— Rajnish Vishwakarma















