आख़िरी दफ़ा मिलना आख़िरस सज़ा होना

आशिकों के क़िस्मत में होता है जुदा होना

एक ही कली ख़ातिर लड़ रहे थे दो भौरे
इस लिए भी लाज़िम था इक का बे-वफ़ा होना

साँस जब तलक चलती रक़्स साथ करना है
उम्र भर की तड़पन ले सब को है फ़ना होना

हम रुमाल है उस के वो ख़ुदा है जादूगर
है उसी के हाथों में सबका क्या से क्या होना

जानते हैं तदबीरें झूठ बोलने वाले
इस जहाँ में मुश्किल है सच का क़ाफ़िला होना

जिस तरह जुदाई से मर गया था इक मजनूँ
उस तरह से घातक है हम में फ़ासला होना

— Rajnish Vishwakarma

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