थोड़ा कम थोड़ा सा ज़ियादा है
इश्क़ है या कोई ख़सारा है
डाँट कर है जिसे भगाया गया
देखो बच्चा वो भूखा प्यासा है
इश्क़ की बात कर रहा है जो
कोई पागल नहीं दिवाना है
तंग क्यूँ करते हो उसे लेकिन
जैसा भी है वो अब तुम्हारा है
जीत मुमकिन यहाँ नहीं होती
इश्क़ में जो गया है हारा है
— Ritika reet















