क्या मुसीबत ये फिर खड़ी कर ली
हिज्र से तुम ने दोस्ती कर ली
जुगनुओं को निकाला आँगन से
ज़िन्दगी फिर से बरहमी कर ली
है नशा ये नई मोहब्बत का
दोस्तों से भी दुश्मनी कर ली
तुम न आए तो हम ने भी देखो
है अँधेरों से दोस्ती कर ली
तुम से कह ना सके ग़म-ए-दिल को
हम ने लेकिन ये शा'इरी कर ली
हादसा ये नसीब ही में था
सोच कर हम ने वापसी कर ली
— Ritika reet















