दर्द-ए-दिल तो किसी की दुआ है मुझे
आप कहते अचानक मिला है मुझे
आख़िरी बार कहती हूँ सब को सुनो
उस पे जो भी हँसे वो बुरा है मुझे
एक अरसे से देखा नहीं है जिसे
वो कहीं से सुना देखता है मुझे
साथ जिस के बिताई हैं रातें सभी
रौशनी में वो क्यूँ ढूँढ़ता है मुझे
ज़िक्र सब से मोहब्बत का करते नहीं
वो जो पूछे तो कह दूँ हुआ है मुझे
चाहती हूँ मैं कहना कि सब ठीक है
कोई तो पूछे क्या हो गया है मुझे
— Ritika reet















