दीप कोई वहाँ पर जला ही नहीं

उस के दिल में कभी कोई था ही नहीं

मैं ने माँगा था रब से उसे इस लिए
वो मुसलसल किसी का हुआ ही नहीं

दो दिवारों में पहले लड़ाई हुई
फिर दरारों से दामन छुटा ही नहीं

साथ मेरे अजब हादसा हो गया
वो हुआ सबका मेरा हुआ ही नहीं

एक तस्वीर से मैं ने तस्वीर ली
शख़्स दो है मगर एक था ही नहीं

— Ritika reet

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