मैं आग इश्क़ की फिर से बुझा के आई हूँमैं जानती हूँ किसी को बचा के आई हूँगले लगा के मुझे रो रही थी तन्हाईसो मैं भी आँख से आँसू बहा के आई हूँ— Ritika reet