आपका दिल अगर ख़ूबसूरत नहीं
तो मियाँ हुस्न की कोई क़ीमत नहीं
मैंने लूटी नहीं जिस्म की सल्तनत
ये क़बीले की मेरे रिवायत नहीं
दस्त-ए-दिल पर लिखा इस्म-ए-जान-ए-जिगर
जब कहा उस ने तुमको मुहब्बत नहीं
इब्न-ए-आदम यूँँ दुखता है आदम का दिल
बिन्त-ए-हव्वा की दुनिया में इज़्ज़त नहीं
पहले बेचैन रहता था दिल दीद को
अब तिरे दीद की दिल में हसरत नहीं
हम ग़ुलाम-ए-अली हैं ग़ुलाम-ए-अली
हमको मसनब की दुनिया की चाहत नहीं
ज़िंदगी पर तेरी तुझ पे लानत शजर
हक़ परस्ती की गर तुझ
में हिम्मत नहीं
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