अब हमको ज़माने में ये मंज़र नहीं मिलता
नेज़े की बुलंदी पे कोई सर नहीं मिलता
मिलते हैं सदा प्यासे समंदर से जहाँ में
प्यासो से कभी आ के समंदर नहीं मिलता
मैं दुश्मनी या 'इश्क़ करूँँ तो करूँँ किससे
मुझको तो कोई क़द के बराबर नहीं मिलता
उस शख़्स से दिल जा मिला दुनिया में हमारा
जिस शख़्स से सुन यार मुक़द्दर नहीं मिलता
हैं यूँँ तो ज़माने में बहुत सारे सुखन वर
ग़ालिब सा मगर कोई सुखन वर नहीं मिलता
जिस पर कभी तारीख़-ए-मुलाक़ात लिखी थी
गुम हो गया उसको वो कैलेंडर नहीं मिलता
बनते हैं सब अफ़राद इलाही तेरे बन्दे
दिल में किसी अफ़राद के पर डर नहीं मिलता
गर मजनू ओ फ़रहाद शहादत नहीं देते
तो 'इश्क़ का परचम हमें घर घर नहीं मिलता
दिल भर के मिला करता है वो शख़्स सभी से
और देखो शजर मुझसे घड़ी भर नहीं मिलता
सदियों से शजर चाक गरेबाँ हैं मोहब्बत
सदियों से इसे कोई रफ़ूगर नहीं मिलता
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