amaan milegi batao kahaan museebat men | अमाँ मिलेगी बताओ कहाँ मुसीबत में

  - Shajar Abbas

अमाँ मिलेगी बताओ कहाँ मुसीबत में
घिरा हुआ है ज़मीं आसमाँ मुसीबत में

तबस्सुम-ए-लब-ए-कमसिन का ऐसा वार हुआ
सितम के साथ है तीर-ओ-कमाँ मुसीबत में

रसन गलों में है और दर-ब-दर भटकते हैं
कोई असीरों को दे दे अमाँ मुसीबत में

जो दावे करते थे हर वक़्त साथ रहने के
वो सारे लोग हैं आख़िर कहाँ मुसीबत में

रदीफ़ जब से मुसीबत रखी ग़ज़ल की शजर
ग़ज़ल ये पढ़ता है सारा जहाँ मुसीबत में

  - Shajar Abbas

Waqt Shayari

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