हमसे जलने वाले जलते जाएँगे
और हम दुनिया बदलते जाएँगे
सर उठेंगे जो मोहब्बत के खिलाफ़
हम वो सारे सर कुचलते जाएँगे
हाल वो कर लूँगा ग़म में हिज्र के
देख के सब हाथ मलते जाएँगे
दस्त-ए-नाज़ुक से छूएँगे वो हमें
और मुर्शीद हम पिघलते जाएँगे
राह-ए-हक़ पर हम को चलता देखकर
बातिलों के दिल दहलते जाएँगे
धीरे धीरे ये शजर और इसके यार
सब तेरी सोहबत में ढलते जाएँगे
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