hunar ye aazmaaya ja raha hai | हुनर ये आज़माया जा रहा है

  - Shajar Abbas

हुनर ये आज़माया जा रहा है
मुझे दिल से निकाला जा रहा है

हमारा दिल फ़क़त इक दिल नहीं ये
ख़ुदा के घर को तोड़ा जा रहा है

हमारे 'इश्क़ का फ़रहाद क़िस्सा
किताबों में पढ़ाया जा रहा है।

दिल-ए-नादाँ नहीं लगता तेरे बिन
उसे ख़त में ये लिक्खा जा रहा है।

कहीं नज़रें न कर बैठे हिमाकत
यूँँ नज़रों को चुराया जा रहा है

मोहब्बत ला दवा है ला दवा दुख
हर इक आशिक़ ये कहता जा रहा है।

तुम्हारे 'इश्क़ में दश्त-ए-जुनूँ को
तुम्हारा क़ैस लैला जा रहा है

ज़माना देख कर कहता है मुझको
वो देखो ग़म का मारा जा रहा है

था वा'दा बिछड़े तो मर जाएँगे हम
सो अब वा'दा निभाया जा रहा है

वो उतना याद आए जा रहे हैं
उन्हें जितना भुलाया जा रहा है

मोहब्बत है ज़माने को समर से
शजर को हाए काटा जा रहा है

  - Shajar Abbas

Ishq Shayari

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