लोग तो शायरी से डरते हैं
और हम आशिक़ी से डरते हैं
लानत ऐसे तमाम लोगों पर
जो तेरी दिलबरी से डरते हैं
रास ख़ुशियाँ हमें नहीं आती
इसलिए हम ख़ुशी से डरते हैं
पहले डरते थे हम अँधेरों से
और अब रौशनी से डरते हैं
हर अदा से तेरी मोहब्बत है
बस तेरी बे-रुख़ी से डरते हैं
लोग डरते हैं मौत से देखो
हम शजर ज़िंदगी से डरते हैं
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