"कौन हूँ मैं"
मैं कोई डाकू या लूटेरा भी तो नहीं
फिर क्यूँ लोगों की आँखों में आँसू है
जब मैं लौट रहा हूँ
मैं कोई तमाशागर या साहिर भी नहीं
जो मेरे आने ख़ुशी बच्चों में हो
और अभी मेरे जाने से दुख हो रहा हो
तो आख़िर कौन हूँ मैं
जो रोज़ लिखता हूँ अपने उदास लफ़्ज़
और कहीं ना कहीं तसल्ली देता हूँ
अपनी उदासी को
शायद मैं जन्म दे रहा हूँ ख़ुद में
एक शाइ'र को
— Sandeep Rajput















