बिखर जाने की नौबत आ गई है
कहाँ ले कर ये क़िस्मत आ गई है
मुहब्बत की हुई आमद है जब से
बड़ी जीने में लज़्ज़त आ गई है
वो सज कर रूबरू आए हैं ऐसे
समझ लो बस क़यामत आ गई है
मुहब्बत का चला जादू है शायद
तभी चेहरे पे रंगत आ गई है
पराए हो गए अपने भी जब से
हमारे घर में ग़ुर्बत आ गई है
— Gulshan















