ख़्वाब में ही आना जाना रह गया

याद बस गुज़रा जमाना रह गया

मैं हूँ तन्हा सामने है आइना
अब न कुछ बाक़ी बहाना रह गया

ले गया यादों के मौसम साथ वो
मुझ पे बस इक ख़त पुराना रह गया

रूह कब की जा चुकी है उस के साथ
अब तो बस ये तन जलाना रह गया

जोड़कर ख़ुशियाँ बनाया घोंसला
उड़ गया पंछी ठिकाना रह गया

— Gulshan

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