किसी साँचे में ढले तुम भी नहीं
हम बुरे हैं तो भले तुम भी नहीं
हिज्र की आग क़यामत थी मगर
बच गए हम भी जले तुम भी नहीं
हम भी मजबूर अना के हाथों
दो क़दम साथ चले तुम भी नहीं
सिर्फ़ हम से ही वफ़ा की उम्मीद
ऐसे नाज़ों के पले तुम भी नहीं
हम भी मुरझा गए तुम बिन 'गुलशन'
हिज्र में फूले फले तुम भी नहीं
— Gulshan















