दुखों को सुख बताया जा रहा है

यूँ रोते को हँसाया जा रहा है

दुखी लाचार बेबस लोग हैं जो
उन्हें बेहद सताया जा रहा है

जहाँ पर बाँटते हैं दर्द काँटे
वहाँ पर गुल खिलाया जा रहा है

उजाले के लिए दीपक जलाकर
अँधेरे को मिटाया जा रहा है

मिले थे ज़ख़्म जिस के प्यार में ये
उसे दिल में बसाया जा रहा है

हटाने थे सभी सन्देह 'गुलशन'
भरोसा क्यूँ उठाया जा रहा है

— Gulshan

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