मौसम में वो बात नहीं है
तेरा मेरा साथ नहीं है
सूखी आँखें दरिया ख़ाली
या'नी अब बरसात नहीं है
तू भी सबके जैसी निकली
तुझ
में भी कुछ बात नहीं है
तू दरिया है मैं हूँ तिनका
मेरी कुछ औक़ात नहीं है
इश्क़ तो हर मज़हब को माने
इश्क़ की कोई ज़ात नहीं है
कटी पतंगें लूटे कैसे
'गुल' के लंबे हाथ नहीं है
— Gulshan















