ज़ीस्त से बेज़ार था सो मर गया

बे-सबब किरदार था सो मर गया

झूठा वो इक़रार था सो मर गया
नाम का बस प्यार था सो मर गया

जान माँगी थी किसी ने प्यार से
आदमी दिलदार था सो मर गया

नफ़रतों का खेल जो रचता था वो
ज़ेहन से बीमार था सो मर गया

बे-वफ़ा दुनिया से रखना ज़ीस्त में
आसरा बेकार था सो मर गया

— Gulshan

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